नई दिल्ली:- सीजेपी नेता सौरव दास ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संगठन ने 5 सितंबर को प्रदर्शन करने का अपना आह्वान वापस ले लिया है। दास ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष एक बयान पढ़ा, जिसके बाद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार जुलाई में सीजेपी नेताओं को दिए गए आश्वासनों के प्रति प्रतिबद्ध है, जब उन्होंने नीट और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अपना 36 दिनों का प्रदर्शन वापस ले लिया था।
मेहता ने कहा कि केंद्र और महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल तथा असम की सरकारें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस लेने के लिए तैयार हैं, सिवाय उन व्यक्तियों के जिनके नाम अपराधों से जुड़े मामलों में पहले से शामिल हैं।
सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करे और निर्देश दे कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को बंद माना जाए।
मेहता ने यह भी कहा कि सरकार आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजे के भुगतान के लिए तीन महीने के भीतर रूपरेखा तैयार करेगी। केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि वह अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करे।
अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को उसके समक्ष लंबित मामले में "पूर्ण न्याय" सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कोई भी आदेश देने का अधिकार देता है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के उठने से ठीक पहले सोमवार को सीजेआई सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया था।
मेहता ने पीठ को बताया, “हम एक आईए (इंटरलोक्यूटरी अपील) दाखिल करना चाहते हैं। यह उस प्रदर्शन के बारे में है... एफआईआर को रद्द करने के लिए... हम अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर रहे हैं,” और मंगलवार को मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की।
सीजेआई ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करने पर सहमति जताते हुए कहा, “ठीक है, आप दाखिल करें। यदि पक्ष समझौता कर रहे हैं, तो हमें कोई दिक्कत नहीं है।”
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब सीजेपी ने केंद्र पर नीट और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर अपना 36 दिनों का आंदोलन वापस लेने के लिए प्रेरित करने के वास्ते 25 जुलाई को दिए गए आश्वासनों को पूरा करने में विफल रहने का आरोप लगाया था।