ऊना, 12 फरवरी:- विकास खंड बंगाणा की ग्राम पंचायत खरयालता में मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्यों में कथित अनियमितता के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए पंचायत प्रधान राकेश धीमान के खिलाफ कार्रवाई की है। उपायुक्त ऊना द्वारा जारी कार्यालय आदेश के अनुसार उन्हें हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 के प्रावधानों के तहत छह माह की अवधि के लिए पंचायत के किसी भी कार्य या गतिविधि में भाग लेने से वर्जित कर दिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत खरयालता में मनरेगा अंतर्गत कराए गए विकास कार्यों को लेकर शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के आधार पर जिला पंचायत अधिकारी ऊना के माध्यम से जांच प्रक्रिया शुरू की गई और खंड विकास अधिकारी बंगाणा को प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए गए।
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए नियमित जांच के आदेश जारी किए गए। उपमंडलाधिकारी बंगाणा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में मनरेगा कार्यों में अनियमितता बरते जाने की पुष्टि होने की बात सामने आई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई से पूर्व ग्राम पंचायत प्रधान को हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 146(1) के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। प्रधान द्वारा प्रस्तुत जवाब का परीक्षण करने के बाद प्रशासन ने उसे असंतोषजनक पाया।
इसके उपरांत उपायुक्त ऊना ने अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए अधिनियम की धारा 146(1-क) के तहत प्रधान राकेश धीमान को छह माह के लिए पंचायत के किसी भी कार्य या गतिविधि में भाग लेने से वर्जित करने के आदेश जारी किए।
कार्यालय आदेश की प्रतिलिपि निदेशक, पंचायती राज विभाग शिमला, जिला पंचायत अधिकारी ऊना, खंड विकास अधिकारी बंगाणा, ग्राम पंचायत सचिव तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को अनुपालना सुनिश्चित करने के लिए प्रेषित कर दी गई है। प्रशासन ने आदेश के कड़ाई से पालन के निर्देश भी जारी किए हैं।
यह कार्रवाई पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में प्रशासन की सख्ती को दर्शाती है।