हिसार, 8 मार्च:- "जींद जिला में सफीदों की गीता कॉलोनी में पिछले 4 वर्षों से चल रही एक पटाखा/ रंग रोगन बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक आग लगने व फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर बाहर ताला लगा होने के कारण 5 पुरुष व 18 महिलाएं मजदूर अंदर ही हादसे के शिकार हो गए और बुरी तरह से झुलस गए। आग इतनी भयंकर थी कि 4 महिलाओं ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। 7 अन्य श्रमिकों की हालत गंभीर है।
हरियाणा भर में एक पर एक इस तरह के हादसे आए दिन होते ही जा रहे हैं। सरकार इन पर रोक लगाने में पूरी तरह से असफल साबित हो रही है। श्रम विभाग सहित अन्य तमाम सरकारी विभागों के संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाना क्यों नहीं चाह रहे हैं? इसका जवाब उन्हें देना चाहिए। फैक्ट्री के मालिक व प्रबंधक मुनाफा कमाने की हवस में सभी नियम, कायदे व कानूनों को ताक पर रखकर मजदूरों से पशुओं की तरह काम ले रहे हैं। इस तिगड़ी का खामियाजा मजदूर अपनी जान देकर व अपंग होकर चुकाते आ रहे हैं। मरने वाले मजदूरों व अपंग मजदूरों के परिवार तबाह हो रहे हैं।
एआईयूटीयूसी का मानना है कि सफीदों में हुई इस घटना सहित प्रदेश में ऐसी घटनाओं के लिए फैक्ट्री मालिकों/प्रबंधों के साथ ही साथ सरकारी विभागों के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी व्यक्तिगत तौर पर कानूनी कार्रवाई हो, उन्हें भी सख्त सजा मिले।
ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीसी) हरियाणा के प्रदेश सचिव कामरेड हरिप्रकाश व प्रदेश उपाध्यक्ष मेहर सिंह बांगड़ ने आगे कहा की हरियाणा प्रदेश कमेटी एआईयूटीसी सफीदों की इस घटना में मारे गए श्रमिकों के आश्रितों को 50-50 लाख रुपए मुआवजा देने, घायलों का उचित व उच्च स्तरीय पूरा इलाज कराने व उन्हें 10-10 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग करती है। यह भी मांग करती है कि ऐसी घटना दोबारा कहीं भी ना घट सके सरकार इसका पुख्ता प्रबंध करे।
हरियाणा में कहीं भी तय सुदा मानदंडों को अन देखा करके फैक्ट्री ना चले। श्रमिकों से श्रम कानून के दायरे में ही काम लिया जाए व उनके वैधानिक अधिकार उन्हें मिले इसका सरकार पुख्ता प्रबंध करे।
सफीदों जींद की एक फैक्ट्री में लगी आग पर निम्न बयान जारी किया। 5 पुरुष व 18 महिलाएं मजदूर अंदर ही हादसे के शिकार हो गए और बुरी तरह से झुलस गए।
