होशियारपुर- मानव जीवन पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बहुत ही विशेष होता है। यह सकारात्मक ऊर्जा हमें अपने आस-पास के शुद्ध वातावरण से, सही दिशा में बने दरवाजे से और घर में सही स्थिति से मिलती है, ऐसा अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद और लेखक डॉ. भूपेंद्र वास्तुशास्त्री का मानना है।
हमारे भवन से सौभाग्य आने की प्रबल संभावना रहती है। यदि भवन का वास्तु सही है तो उससे निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा से हम खुद को राजा बना लेते हैं और वास्तु दोषों से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा जीवन को नरक बना देती है। माना जाता है कि हमारे भवन में ऊर्जा का प्रवाह मुख्य द्वार से शुरू होता है जिसे वास्तु संरचना की 81 स्थितियों में बांटा गया है।
इन 81 स्थितियों में से 32 स्थितियां बाह्य स्थिति संरचनाएं हैं। इनमें उत्तर दिशा की ओर वाले दरवाजे यानी मुख्य द्वार, भलाट, कुबेर द्वार वास्तु के अनुसार माने गए हैं। पूर्व दिशा में जय और इंद्र की स्थिति शुभ मानी गई है। दक्षिण दिशा में वितथ और गृहक्षत द्वार शुभता की श्रेणी में आते हैं। पश्चिम दिशा में वरुण और पुष्पदंत द्वार शुभ और सकारात्मक माने जाते हैं।
उपरोक्त द्वारों के अलावा यदि भवन का मुख्य द्वार किसी अन्य स्थिति में स्थित है तो इससे अशुभ परिणाम मिलते हैं। इसलिए भवन निर्माण से पहले सही द्वार का निर्धारण करें और अपने जीवन को मंगलमय बनाएं। भवन में आवश्यकतानुसार बराबर संख्या में द्वार बनाएं। यदि आवश्यकता से अधिक द्वार होंगे तो परिणाम अशुभ हो सकते हैं। "अधिक योगी मठ को नष्ट कर देते हैं" वाली कहावत इसके लिए सत्य है।
सही और शुभ दिशा वाला दरवाजा दिलाता है अपार सफलता- डॉ. भूपेंद्र वास्तुशास्त्री
