करनाल, 28अक्टूबर- डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि अभी-अभी दीपावली का त्योहार बीता है, लेकिन इसके बाद वायु प्रदूषण मनुष्य के लिए विकट समस्या बनता जा रहा है। सर्वप्रथम दीपावली पर चर्चा करें तो यह सर्वविदित है कि यह दीपों का त्योहार है। इसके पीछे अनेक मत हैं कुछ लोग इसे अमावस्या की अंधकारमय रात्रि में प्रकाश फैलाने का प्रतीक मानते हैं, जबकि सर्वसाधारण रूप से इसे भगवान श्रीरामचंद्र जी के अयोध्या लौटने की स्मृति में मनाया जाता है।
भगवान श्रीरामचंद्र जी के आदर्शों की यदि चर्चा करें, तो उनका जीवन सदैव जनकल्याण को समर्पित रहा। अपने पिता के वचन की पालना के लिए उन्होंने सहर्ष 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र जी ने सदैव नैतिकता को सर्वोपरि रखा और उसे अपने जीवन में धारण किया। ऐसे में उनके आदर्शों का सम्मान करते हुए हमें भी उन्हें अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
दीपावली की रात ही नहीं, बल्कि उससे पूर्व और कई दिनों बाद तक लोग पटाखे फोड़कर वायु एवं ध्वनि प्रदूषण फैला रहे हैं। यह त्योहार न तो वायु प्रदूषण के लिए है, न ध्वनि प्रदूषण के लिए। दुर्भाग्यवश, यही बात आज लोगों की समझ से परे है।
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन का सार ही मर्यादा, संयम और लोककल्याण था — किसी को पीड़ा पहुँचाना नहीं। फिर कैसे यह माना जाए कि पटाखे फोड़कर वातावरण प्रदूषित कर हम उनके दिखाए मार्ग पर चल रहे हैं?
डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि यदि हम अन्य दृष्टिकोण से देखें, तो पटाखों पर व्यय किया गया धन यदि परोपकार में लगाया जाए, तो उससे मिलने वाला आत्मिक आनंद और शांति शब्दों से परे होगी।
**वाहनों और धुएँ का कहर
आज वाहनों द्वारा छोड़ा गया धुआँ भी मानव जीवन को दुष्कर बना रहा है। एक व्यक्ति के घर में आज कई-कई वाहन होना सामान्य बात है। घर में जितने सदस्य, लगभग उतने ही वाहन! इन वाहनों का धुआँ, कारखानों के उत्सर्जन, निर्माणाधीन भवनों की धूल, कूड़े में लगाई जाने वाली आग और खेतों में फसल जलाने जैसी गतिविधियाँ सब मिलकर वायुमंडल को गंभीर रूप से प्रदूषित कर रही हैं। लोग इन बातों को हल्के में लेते हैं, लेकिन यही छोटे-छोटे कारण मिलकर बड़े खतरे का रूप ले रहे हैं। दिल्ली सहित आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण के कारण श्वसन रोग, फेफड़ों की बीमारियाँ और यहाँ तक कि कैंसर जैसे गंभीर रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।
**समाधान की ओर
इस समस्या से छुटकारा पाना एक बड़ा प्रश्न है। दुर्भाग्य से सरकारी विभागों में भी कई बार कूड़े में आग लगने जैसी घटनाएँ होती हैं, जो पर्यावरण को और प्रदूषित करती हैं।
हर व्यक्ति अपने अधिकारों की बात करता है, लेकिन कर्तव्यों को भूल जाता है। प्रकृति ने हमें जल, वायु, आकाश, अग्नि और पृथ्वी जैसे अनमोल वरदान दिए हैं, परंतु मानव उनका निरंतर शोषण कर रहा है। यदि व्यक्ति केवल प्रकृति से छेड़छाड़ न करे, तो वही एक महान सेवा होगी।
उन्होंने कहा कि मानव को केवल लेना नहीं, बल्कि प्रकृति को लौटाना भी सीखना चाहिए। छोटे-छोटे प्रयासों से हम बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। जैसे अपने या अपने बच्चों के जन्मदिन पर पौधारोपण करें और उनकी देखभाल करें।
परिवार की आवश्यकता अनुसार ही वाहन रखें। अकेले यात्रा करने की बजाय सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करें। ईंधन चालित वाहनों की जगह साइकिल का उपयोग करें , यह प्रदूषण-मुक्त, स्वास्थ्यवर्धक और शरीर के लिए लाभकारी है।
वाहनों में स्वच्छ ईंधन का प्रयोग करें और उनका उचित रखरखाव करें।कूड़े-कचरे में आग न लगाएँ, उसका उचित निपटान करें। निर्माण सामग्री को ढककर रखें। औद्योगिक इकाइयों को चाहिए कि वे प्रदूषण-रहित ईंधन प्रणाली अपनाएँ, ताकि जीवन सुरक्षित रह सके।
