आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा पंजाब में शिक्षा क्रांति लाने के प्रयासों के बावजूद, अब तक सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में प्रिंसिपलों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इसका कारण वर्ष 2018 के शिक्षा विभाग के नियम हैं, जिनमें पदोन्नति कोटा को 100% से घटाकर 50% कर दिया गया था — अर्थात 50% प्रिंसिपल सीधी भर्ती से और 50% पदोन्नति के माध्यम से नियुक्त किए जाने हैं।
हालांकि, शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा इन नियमों में संशोधन के बयान के बाद, पिछले 25 वर्षों से मेरिट आधार पर नियुक्त अनुभवी लेक्चरारों को पदोन्नति की उम्मीद जगी है।
गवर्नमेंट स्कूल लेक्चरार यूनियन पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष संजीव कुमार, वरिष्ठ सह अध्यक्ष अमन शर्मा, प्रदेश प्रेस सचिव रणबीर सिंह सोहल और जिला संगरूर के अध्यक्ष जसपाल सिंह ने शिक्षा मंत्री को नियमों में संशोधन कर प्रिंसिपलों की खाली सीटों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की मांग की। उन्होंने बताया कि संगरूर जिले के 104 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में से 60 स्कूल बिना प्रिंसिपल के चल रहे हैं।

कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
शिक्षा ब्लॉक चीमा: 13 में से 10 स्कूल जैसे साहोके ढड्डरियां, दूंगा, चोवास जखेपाल, सेरों, साहपुर कलां, धर्मगढ़ संगरूर, नमोल, कनकवाल, चीमा और गंडूआं प्रिंसिपल से खाली हैं।
शिक्षा ब्लॉक धूरी: 7 में से धूरी पिंड, जहांगीर केहड़ा, धूरी (गर्ल्स), ढढोगाल खेड़ी आदि स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं।
ब्लॉक लहरागागा: हरियूं, लहेल कलां, लहरागागा गर्ल्स, गोबिंदगढ़ खोखर, बखोरा कलां, भूल कलां, दसिया, रैड़ा राना, सादीहरी, संगतपुरा स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं।
ब्लॉक संगरूर 1 व 2: छंगल, एलेना गग्गरपुर, संगरूर गर्ल्स, कांझला, फग्गूवाला, भलवान, सकरोदी, मांझी, भारो स्कूलों में प्रिंसिपल की तैनाती नहीं है।
ब्लॉक सैरपुर: मलैवाल, सैरपुर, कैरों, टिब्बा, खेड़ी छेहला स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं।
ब्लॉक सुनाम 1 व 2: नीलोवाल, चड्ढा नहेड़ा, कौहरिया, छहर, कपैल, लदबन जाग कलां, सुलर घराट, बघरोल, महिलां, गुजरां स्कूल प्रिंसिपल से खाली हैं।
ब्लॉक मूनक: सभी स्कूल प्रिंसिपल के बिना चल रहे हैं — बलराज, रामपुरा गनोता, मूनक (लड़के), भूलां, बंगां, मनीआना, माडवीं, अंडाना, मूनक गर्ल्स, दुडियाना, खनौरी गर्ल्स, पीएम श्री खनौरी कलां, मनवी आदि।
इसके अतिरिक्त, पंजाबी विषय सहित अन्य विषयों के लेक्चरारों की पोस्टें भी खाली हैं।
इन रिक्त पदों को पदोन्नति से भरने पर, कम समय सेवा और लंबी सेवा वाले शिक्षकों को तरक्की का लाभ मिलेगा, जो शिक्षा क्रांति को साकार करने में सहायक सिद्ध होगा।