हिसार, 20 जनवरी:- हरियाणा पंचायत राज संस्थान अधिनियम में संशोधन के रास्ते ग्राम सभा की बैठक के लिए 40 प्रतिशत की ग्राम सभा सदस्यों की  अनिवार्य उपस्थिति को एस यू सी आई  कम्युनिस्ट ने , हर लिहाज से अव्यवहारिक करार देते हुए कहा कि सरकार का यह फैसला वस्तुत पंचायती राज संस्थान को पंगु करने की साजिश है। एस यू सी आई कम्युनिस्ट के राज्य सचिव कॉमरेड राजेंद्र सिंह एडवोकेट व राज्य सचिव मंडल सदस्य मेहर सिंह बांगड़ ने कहा कि सरकार का यह फैसला पंचायती राज संस्थान को ध्वस्त करेगा। 
इससे विकास कार्य ठप्प होंगे। इस संशोधन से पहले प्रदेश के पंच, सरपंचों से कोई राय भी नहीं ली गई। ग्राम सभाओं की पहले भी मीटिंग होती रही है और विकास कार्य होते रहे है।  सरकार का यह संशोधन कि पहली ग्राम सभा में 40 प्रतिशत की हाजिरी ना हो तो ,फिर अगले मीटिंग में 30 प्रतिशत की हाजिरी और अगर 30 प्रतिशत की हाजिरी ना हो तो फिर 20 प्रतिशत की हाजिरी हो।
 ये सब विकास  कार्यों को और विकास कार्यों  के लिए स्वीकृत ग्रांट को ताक पर रखकर ,ग्रामीणों  को  उलझाए रखने के अलावा और कुछ नहीं है। सरकार ने अभी तक यह नहीं बताया कि ग्राम सभा बुलाने का जो नियम पहले था , उससे विकास कार्य कैसे बाधित हो रहे थे।
एसयूसीआई नेताओं ने  सरकार से मांग की है इस तुगलकी फरमान को जनहित में तुंरत वापिस लिया जाए एवं ग्रामीणों से अनुरोध किया है कि ग्रामीण विकास को रोकने वाले इस नियम का विरोध करे। प्रदेश की पंचायत इसके विरोध में आगे आए।