शहीद-ए-आजम के असली वारिस किसानों और मजदूरों पर कहर बरपा कर मान ने पंजाब विरोधी और दिल्ली वालों का पिट्ठू होने का स्पष्ट सबूत दिया-तलविंदर सिंह हीर

होशियारपुर- पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन चलाने वाले स्वतंत्रता सेनानी चाचा अजीत सिंह के पदचिन्हों पर चलते हुए और शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह और उनके महान साथियों राजगुरु और सुखदेव की शहादत से पहले फांसी के फंदे को चूमकर मान सरकार ने खुद को अंग्रेजों से कहीं ज्यादा क्रूर, धोखेबाज और दिल्ली वालों का पिट्ठू और पिट्ठू साबित कर दिया।

होशियारपुर- पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन चलाने वाले स्वतंत्रता सेनानी चाचा अजीत सिंह के पदचिन्हों पर चलते हुए और शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह और उनके महान साथियों राजगुरु और सुखदेव की शहादत से पहले फांसी के फंदे को चूमकर मान सरकार ने खुद को अंग्रेजों से कहीं ज्यादा क्रूर, धोखेबाज और दिल्ली वालों का पिट्ठू और पिट्ठू साबित कर दिया। 
शहीद-ए-आजम ने महज 23 साल की उम्र में अपनी शहादत से पहले ही यह आशंका जाहिर कर दी थी कि ये वही देशी शासक हैं जो अंग्रेजों से भी ज्यादा खतरनाक और लुटेरे हैं और देश के लोगों को सचेत रहने का संदेश दिया था। मौजूदा केंद्रीय व राज्य शासकों ने अपनी गैर-कानूनी कार्रवाइयों व सरासर नाजायज जबरदस्ती से इसे सही साबित कर दिया है तथा सच्चाई के लिए लड़ रहे लोगों के साथ विश्वासघात किया है, जिसकी कीमत इन अहंकारी शासकों को बहुत जल्द चुकानी पड़ेगी। 
केंद्र सरकार व उसके पिट्ठू भगवंत मान के सौतेले व्यवहार ने पंजाब की नैया डुबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पूरी दुनिया में देश व राज्य के इंसाफ पसंद लोग ऐसे निकम्मे व लुटेरे शासकों का डटकर विरोध कर रहे हैं। अन्नदाताओं के प्रति गुंडागर्दी व द्वेष केंद्र व राज्य सरकारों की जड़ें हिला देगा। पंजाब, गुरुओं, पीरों, भक्तों व महान शहीदों की विरासत को खत्म करने की सोच रखने वाले मुगलों व अंग्रेज शासकों की तरह ही देश व राज्य के मौजूदा शासकों को मुंह की खानी पड़ेगी तथा आने वाली पीढ़ियां उन्हें कोसती रहेंगी।
 इतिहास गवाह है कि पंजाब को उजाड़ने की सोचने वाले खुद उजाड़ हो जाते हैं तथा पंजाबी हर संकट से बेदाग निकलकर जुल्मों के खिलाफ डटकर मुकाबला करते हैं। शहीद भगत सिंह और उनके साथियों की शहादत के दिनों में केंद्र और राज्य सरकारों की मिलीभगत से की गई गुंडागर्दी को मेहनतकश लोग कभी नहीं भूलेंगे और न ही इसके लिए जिम्मेदार शासकों को कभी माफ करेंगे। 
ऐसे मौके पर शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए इंसाफपसंद लोगों को केंद्र और राज्य सरकारों की मिलीभगत से किसानों पर हो रहे अत्याचारों का विरोध करने के लिए आगे आना चाहिए। इसके खिलाफ गांव-गांव में विरोध प्रदर्शन किए जाने चाहिए और शहीदों के सपनों का समाज बनाने के लिए संघर्ष के मैदान में लड़ने के लिए तैयार रहना होगा। 
संयुक्त किसान मोर्चा के समझदार नेताओं के आह्वान पर संघर्ष करना होगा और यह संघर्ष तब तक जारी रखना होगा जब तक इंसान द्वारा इंसान का शोषण पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता। तभी आजादी की लड़ाई के सभी शहीदों के सपने साकार होंगे और देश की एकता और अखंडता बच पाएगी।