चंडीगढ़:- पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ में पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी में डीएम ट्रेनी डॉ. पार्थ लाल ने प्रतिष्ठित 2025 पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी ट्रेनी अवार्ड के पहले भारतीय प्राप्तकर्ता बनकर संस्थान और भारतीय पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाई है। यह पुरस्कार पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी में किसी ट्रेनी द्वारा लिखे गए उत्कृष्ट मौलिक शोध लेख को मान्यता देता है। चयन प्रक्रिया में शोध के वैज्ञानिक महत्व, पद्धतिगत कठोरता, गुणवत्ता और नवाचार पर विचार किया जाता है।

डॉ. पार्थ को यह सम्मान उनके शोध “NitRIS Trial” के लिए मिला, जो Pediatric Neurology में प्रकाशित हुआ था। इस शोध ने शिशु मिर्गी ऐंठन सिंड्रोम (IESS) से पीड़ित बच्चों में नाइट्राजेपम की संभावित प्रभावशीलता के संबंध में अवधारणा के प्रमाण (प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट) संबंधी साक्ष्य प्रस्तुत किए। यह शैशवावस्था में मिर्गी का एक चुनौतीपूर्ण रूप है, जिसका इलाज करना मुश्किल हो सकता है। उनका शोध इस स्थिति के लिए एक संभावित उपचार विकल्प की खोज करता है, जिसमें समय पर और प्रभावी उपचार विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। पत्रिका के संपादकीय बोर्ड के सदस्यों द्वारा लिखे गए संपादकीय ने भी इस शोध की वैज्ञानिक प्रासंगिकता को रेखांकित किया है।

यह पुरस्कार आज कनाडा के क्यूबेक प्रांत के मॉन्ट्रियल में आयोजित 2026 चाइल्ड न्यूरोलॉजी सोसाइटी की बैठक में प्रदान किया गया। इस सम्मान के माध्यम से डॉ. पार्थ के वैज्ञानिक योगदान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता मिली। उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए इस उपलब्धि का श्रेय बाल रोग विभाग के शोध परिवेश, मार्गदर्शन और सहयोग को दिया।

इससे पहले, दिसंबर 2025 में, डॉ. पार्थ लाल को अमेरिकन एपिलेप्सी सोसाइटी (AES) की ओर से सुज़ैन और पीटर बेरी इंटरनेशनल ट्रैवल अवार्ड प्राप्त हुआ था। 1,500 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों में से चयनित होकर वह दुनिया भर के उन केवल दो युवा शोधकर्ताओं में शामिल हुए, जिन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला। यह उपलब्धि उनके शोध के वैश्विक महत्व को रेखांकित करती है।

ये उपलब्धियां दर्शाती हैं कि युवा चिकित्सक-वैज्ञानिक कठोर, नवाचारी और चिकित्सकीय रूप से प्रासंगिक शोध के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। ये चुनौतीपूर्ण तंत्रिका संबंधी विकारों से प्रभावित बच्चों के लिए उभरते शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करने तथा वैज्ञानिक समझ और उपचार के विकल्पों को आगे बढ़ाने के प्रति पीजीआईएमईआर की निरंतर प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती हैं।