चंडीगढ़, 20 अक्टूबर:- हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व आयोडीन अल्पता दिवस सामान्य वृद्धि, विकास और समग्र स्वास्थ्य में आयोडीन के महत्व पर प्रकाश डालता है। इस दिवस का उद्देश्य आयोडीन की कमी के बारे में जागरूकता बढ़ाना और एक सरल निवारक उपाय के रूप में पर्याप्त आयोडीन युक्त नमक के उपयोग को बढ़ावा देना है।

आयोडीन एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जिसकी आवश्यकता थायरॉयड ग्रंथि को ऐसे हार्मोन बनाने के लिए होती है, जो चयापचय, शरीर के तापमान, वृद्धि और मस्तिष्क के विकास को नियंत्रित करते हैं। चूंकि शरीर स्वयं आयोडीन का उत्पादन नहीं कर सकता, इसलिए इसे आहार के माध्यम से प्राप्त करना आवश्यक है। गर्भवती महिलाएं, शिशु और छोटे बच्चे विशेष रूप से आयोडीन की कमी के प्रति संवेदनशील होते हैं।

इस अवसर पर बोलते हुए, पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. संजय भडाडा ने कहा कि आयोडीन की आवश्यकता भले ही कम मात्रा में होती है, लेकिन यह स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी से थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ना (घेंघा), हाइपोथायरायडिज्म और गंभीर मामलों में शारीरिक तथा संज्ञानात्मक विकास बाधित हो सकता है। गर्भावस्था और प्रारंभिक बचपन के दौरान पर्याप्त आयोडीन का सेवन बच्चे के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के उचित विकास के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

प्रो. भडाडा ने जोर देकर कहा कि पर्याप्त मात्रा में आयोडीन युक्त नमक का नियमित सेवन आयोडीन की कमी को रोकने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक है। लोगों को जांचना चाहिए कि उनका नमक आयोडीन युक्त है या नहीं और इसे ठंडी तथा सूखी जगह पर ढक्कन वाले बर्तन में रखना चाहिए। जहां तक संभव हो, खाना पकाने के अंत में नमक डालने से भी आयोडीन की हानि कम करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोडीन युक्त नमक का उपयोग करने का अर्थ नमक का सेवन बढ़ाना नहीं है, क्योंकि अधिक मात्रा में नमक खाने से उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। पर्याप्त मात्रा में आयोडीन युक्त नमक का सेवन करने वाले लोगों को आमतौर पर चिकित्सकीय सलाह के बिना अतिरिक्त आयोडीन सप्लीमेंट लेने की आवश्यकता नहीं होती।

एंडोक्रिनोलॉजी विभाग ने आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों को रोकने और थायरॉयड स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जन जागरूकता, समय पर निदान तथा उचित चिकित्सकीय परामर्श के महत्व पर जोर दिया।

इस अवसर पर पीजीआईएमईआर ने भावी पीढ़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सही आहार संबंधी जानकारी को बढ़ावा देने और आयोडीन युक्त नमक की उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को दोहराया।