हरोली/ऊना, 25 मार्च (राजवीर चोपड़ा):- हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में आऊटसोर्स कर्मचारियों के लिए कोई ठोस प्रावधान न होने से कर्मचारियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे को लेकर प्रदेशभर के विभिन्न विभागों, बोर्डों और निगमों में कार्यरत आऊटसोर्स कर्मचारियों ने विश्राम गृह बिलासपुर में बैठक की ओर आगे की रणनीति तैयार की गई।
ओर एक संयुक्त बैठक आयोजित की, जिसमें अहम फैसले लिए गए।
बैठक में बिजली बोर्ड आऊटसोर्स कर्मचारी यूनियन सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों और उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान कर्मचारियों के शोषण, कम वेतन, नौकरी की असुरक्षा और अन्य लंबित मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।
संघ के संयोजक अश्विनी शर्मा और सह-संयोजक सोहन लाल तुलिया ने बताया कि प्रदेश के आऊटसोर्स कर्मचारियों को सरकार से काफी उम्मीदें हैं, लेकिन बजट में उनकी अनदेखी से निराशा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों के हित में कोई सकारात्मक घोषणा नहीं की, तो 27 मार्च को प्रदेशभर के आऊटसोर्स कर्मचारी और उनके प्रतिनिधि शिमला में एकत्रित होकर जोरदार प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में आऊटसोर्स कर्मचारियों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। कई कर्मचारी पिछले 10 से 15 वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें मात्र 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन मिल रहा है। इसके अलावा इतने लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उनके भविष्य और नौकरी की कोई सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि कर्मचारियों की दो प्रमुख मांगें—नौकरी की सुरक्षा और समान कार्य के लिए समान वेतन—को प्राथमिकता के आधार पर सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
संयोजक अश्विनी शर्मा ने कहा कि संघ अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखेगा और सरकार से जल्द आऊटसोर्स पॉलिसी बनाने की मांग की। उन्होंने यह भी बताया कि कई कर्मचारियों की आयु अब 45 वर्ष से अधिक हो चुकी है, ऐसे में सरकार को शीघ्र ठोस निर्णय लेकर उन्हें राहत प्रदान करनी चाहिए।
प्रदेशाध्यक्ष अश्वनी शर्मा का कहना है कि हम 27 मार्च को शिमला में अपनी मांगों को लेकर मौजूदा सरकार के समक्ष हिमाचल प्रदेश में जितने भी आउटसोर्स कर्मचारी है उनके लिए सरकार कोई ठोस पॉलिसी बनाये।
