होशियारपुर:- राष्ट्रीय पोषण सप्ताह हर वर्ष 01 से 07 सितंबर तक मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को संतुलित आहार, उचित पोषण और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
सिविल सर्जन डॉ. मनदीप कमल के दिशा-निर्देशों के अनुसार आज सिविल अस्पताल होशियारपुर में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. नेहा पाल के नेतृत्व में “हर किसी के लिए पौष्टिक आहार जरूरी” थीम के तहत जागरूकता कैंप लगाया गया। इस अवसर पर जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सीमा गर्ग और जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. रणजीत सिंह विशेष रूप से उपस्थित हुए। इस अवसर पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हरनूरजीत कौर, डॉ. सुप्रीत कौर, डॉ. रणवीर कौर, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजरी अरोड़ा, डॉ. परवाज तथा जिला मास मीडिया अधिकारी श्रीमती रामनदीप कौर, एएनएम हरनिंदर कौर और मनीषा सहित स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ उपस्थित था।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. सीमा गर्ग ने कहा कि बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए पौष्टिक आहार के साथ समय पर टीकाकरण भी जरूरी है। माता-पिता को बच्चों के सभी टीके निर्धारित समय के अनुसार लगवाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जन्म के बाद मां का दूध बच्चे के लिए सबसे उत्तम आहार है।
जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. रणजीत सिंह ने कहा कि मां और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए गर्भावस्था से ही पोषण पर ध्यान देना आवश्यक है। गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार के साथ स्वास्थ्य विभाग की सलाह के अनुसार आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड की गोलियां लेनी चाहिए। उन्होंने परिवारों से पोषण संबंधी अंधविश्वासों से दूर रहकर वैज्ञानिक जानकारी अपनाने की अपील की।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. हरनूरजीत कौर ने कहा कि जन्म से छह महीने तक बच्चे के लिए मां का दूध ही संपूर्ण आहार है। इसलिए माताओं को पहले छह महीने तक बच्चे को केवल अपना दूध पिलाना चाहिए और छह महीने के बाद मां के दूध के साथ उम्र के अनुसार पूरक आहार शुरू करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पोषण अभियान का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण और एनीमिया की रोकथाम, कम वजन वाले बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार तथा महिलाओं में एनीमिया को नियंत्रित करना है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजरी अरोड़ा ने गर्भवती महिलाओं को आयरन, कैल्शियम, फोलिक एसिड और प्रोटीन युक्त आहार लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ताजे फल, हरी सब्जियां, दूध, दही, दालें और अनाज को दैनिक आहार में शामिल करना चाहिए, जबकि अधिक तेल वाले, मसालेदार और जंक फूड से परहेज करना चाहिए।
जिला मास मीडिया अधिकारी श्रीमती रामनदीप कौर ने कहा कि पोषण को केवल पोषण सप्ताह तक सीमित न रखकर इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के आहार पर विशेष ध्यान दें तथा अंधविश्वासों के बजाय सही एवं वैज्ञानिक पोषण संबंधी जानकारी को अपनाएं।
बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार बहुत जरूरी राष्ट्रीय पोषण सप्ताह 01 से 07 सितंबर तक मनाया जा रहा है
