पटियाला, 9 दिसंबर: भाषा विभाग, पंजाब द्वारा पंजाबी भाषा की कंप्यूटर आवश्यकताओं पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इससे पहले विभाग की ओर से 'पंजाबी कम्प्यूटरीकरण और मशीन इंटेलिजेंस' पर एक कार्यशाला का आयोजन किया जा चुका है। आज की कार्यशाला के दौरान प्रख्यात कंप्यूटर विशेषज्ञ एवं पंजाबी भाषा के कंप्यूटरीकरण के लिए लंबे समय से कार्यरत डाॅ. सीपी कंबोज ने विभिन्न तकनीकी बिंदुओं पर व्यवहारिक जानकारी साझा की।
उनकी टीम में सुरिंदर सिंह और मनिंदर सिंह शामिल थे। इस कार्यशाला में विद्यार्थियों, प्रोफेसरों, शास्त्रकारों, भाषा विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों के अलावा पंजाबी भाषा को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। विभाग के निदेशक जसवन्त सिंह जफर ने कहा कि पंजाबी भाषा को आज के डिजिटल युग के अनुकूल बनाने के लिए काफी प्रयासों की जरूरत है। इसी के तहत भाषा विभाग ने पंजाबी भाषा को मशीन इंटेलिजेंस में स्थापित करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं, जिसका उद्देश्य अन्य लोगों को जागरूक कर इस मिशन से जोड़ना है।
उन्होंने पंजाबी हितैषियों से अपील की कि वे वर्तमान युग की मशीनी बुद्धि की महती आवश्यकता के लिए लड़ाकू सैनिकों की तरह मिलकर लड़ें। डॉ। सी। पी। चार सत्रों की कार्यशाला के दौरान कंबोज ने पंजाबी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए कंप्यूटर और फोन के उपयोग, पंजाबी फॉन्ट और भाषा से संबंधित सॉफ्टवेयर के सही और कुशल उपयोग, पंजाबी साहित्य और अन्य भाषा से संबंधित सामग्री के डिजिटलीकरण पर विभिन्न सत्रों के दौरान प्रोजेक्टर का उपयोग किया। की सहायता से व्यवहारिक रूप में बहुमूल्य जानकारी साझा की इस दौरान शिंदरपाल सिंह माहल ने कहा कि भाषा विभाग की पहल समय की मांग के अनुसार बहुत उचित और जरूरी है।
यह बात महेंद्र सिंह सेखों ने कही
ऐसी मानक कार्यशालाएँ हर जिले में आयोजित की जानी चाहिए। उन्होंने पंजाबी भाषा के विकास के लिए प्रयासरत संगठनों से अपील की कि वे भाषा विभाग के सहयोग से ऐसी कार्यशालाएं आयोजित करने का प्रयास करें।
सहायक निदेशक आलोक चावला ने सभी का आभार व्यक्त किया। आयोजन की सफलता के लिए सहायक निदेशक अमरेंद्र सिंह, अनुसंधान अधिकारी डाॅ. सुखदर्शन सिंह चहल, सुपरिंटेंडेंट भूपिंदरपाल सिंह और हरप्रीत सिंह ने योगदान दिया।
पंजाबी भाषा को डिजिटल युग का घर बनाने के लिए बड़े प्रयासों की जरूरत: जफर
