गढ़शंकर (हरी कृष्ण गंगड़):- कुल हिंद किसान सभा ने गेहूं और अन्य फसलों के दामों में की गई मामूली बढ़ोतरी को खारिज करते हुए लाभकारी मूल्य और सरकारी खरीद की गारंटी की मांग की है। राज्य सचिव कॉमरेड गुरनेक सिंह भज्जल ने कहा कि डीजल, पेट्रोल, बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और कृषि मशीनरी की लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। फसलों के दामों में की गई मामूली बढ़ोतरी किसानों पर बढ़ते खर्च के साथ न्याय नहीं करती और कर्ज के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट को और गंभीर बना रही है।
राज्य उपाध्यक्ष दर्शन सिंह मट्टू, जिला सचिव आशा नंद और जिला अध्यक्ष अछर सिंह ने कहा कि फसलों के दाम तय करते समय जमीन का किराया, मशीनरी की कीमत में कमी, सिंचाई, बिजली, मजदूरी, ब्याज और पारिवारिक श्रम के साथ-साथ बीज, खाद और डीजल की लागत को भी शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार कम से कम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कुल हिंद किसान सभा ने पांच प्रमुख मांगें रखीं:
- गेहूं और सभी अन्य फसलों के दाम स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार कुल लागत में कम से कम 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर तय किए जाएं।
- सभी प्रमुख फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी जाए, ताकि किसानों को लागत से कम कीमत पर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।
- सरकारी खरीद व्यवस्था को मजबूत किया जाए तथा प्रत्येक मंडी में समय पर, पारदर्शी और निर्बाध खरीद सुनिश्चित की जाए।
- डीजल, पेट्रोल, खाद, बीज और कीटनाशकों की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर रोक लगाई जाए तथा कृषि इनपुट उचित दरों पर उपलब्ध करवाए जाएं।
- ब्याज मुक्त या कम ब्याज वाले कृषि ऋण उपलब्ध करवाए जाएं और प्रभावी कर्ज माफी की जाए।
- नेताओं ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और मौजूदा संकट से राहत दिलाने के लिए सरकारी खरीद की गारंटी और लाभकारी फसल मूल्य बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि मजदूरी और उत्पादन लागत की अनदेखी करते हुए मामूली दाम तय करना किसानों के संकट को और बढ़ाएगा।
- उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो किसान संगठन अपने लोकतांत्रिक संघर्ष को और तेज करेंगे।
