करनाल, 9 नवम्बर:- केंद्रीय आवासन, ऊर्जा एवं शहरी मामले के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि गुरु तेग बहादुर की शहादत से प्रेरणा मिलती है कि हमें समाज, धर्म और देश के लिए काम करना चाहिए। 
 केंद्रीय मंत्री आज यहां एनडीआरआई चौक पर श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित हिंद की चादर मैराथन को हरी झंडी दिखाने से पहले लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरु साहब के 350 साला शहीदी दिवस पर करनाल के साथ-साथ देश भर में यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि  आज हजारों नौजवान 9वें गुरु श्री तेग बहादुर की शहादत को नमन करने के लिए एकत्र हुए हैं। 
यहां आयोजित यात्रा (दौड़) इतिहास रच रही है। सैकड़ो युवाओं ने 5.30 बजे ही 21 किमी लंबी और उसके बाद 6.30 बजे 10 किमी लंबी दौड़ शुरू कर दी। अब 61 हजार युवा-युवतियां 5 किमी लंबी दौड़ में भाग ले रहे हैं। श्री मनोहर लाल ने कहा कि यह केवल दौड़ नहीं बल्कि देश को आजादी कराने वालों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करने के लिए एक उत्साह, जज्बा व भावना है। 

**साथियों की शहादत को भी किया याद
उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर द्वारा देश व समाज के लिए दी गई शहादत की घटना 1675 ईस्वी की है। गुरु जी एक सत्संग में बैठे थे। तब कुछ कश्मीरी पंडित कृपा राम के नेतृत्व में उनके पास आए और बताया कि उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा है। यातनाएं दी जा रही हैं। तब गुरु साहब ने कहा कि किसी महापुरुष द्वारा बलिदान देने पर धर्म परिवर्तन बंद हो सकता है। ऐसा करने से लोगों में जागृति आएगी।
 साथ बैठे 9 वर्षीय उनके पुत्र (जो बाद में 10वें गुरू, गुरू गोविंद सिंह जी हुए) ने कहा कि ऐसा महापुरुष आपके अलावा और कौन हो सकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह गर्व की बात है कि एक पुत्र ने पिता से कहा कि बलिदान देना है तो हम जैसे लोगों को देना चाहिए। गुरु साहब ने पंडित कृपा राम से कहा आप सुल्तान से कह दें कि पहले गुरु तेग बहादुर का धर्म परिवर्तन करें। 
संदेश पाने के बाद सुल्तान ने सेना भेजकर गुरु साहब को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें पहले सरहिंद और फिर दिल्ली लाया गया। गुरु साहब के साथी-भाई मतिदास, भाई दयाला जी और भाई सती दास ने भी साथ ही बलिदान देने की बात कही। पहले भाई मतिदास को आरे से चीरा गया, भाई दयाला को उबलते  तेल के कड़ाहे में तपाकर मारा गया और भाई सती दास को रुई में लपेटकर खंभे से बांधकर आग लगा दी गई।

**बडख़ालसा के युवक के बलिदान का उल्लेख
आवासन व ऊर्जा मंत्री ने कहा कि दिल्ली के चांदनी चौक स्थित गुरूद्वारा शीश गंज के स्थान पर गुरू साहब का धड़ सिर से अलग कर दिया गया था। उन्होंने गुरू साहब के शीश को दिल्ली से आनंदपुर साहिब ले जाने की घटना के दौरान हरियाणा की धरती से जुड़े एक बलिदान का भी उल्लेख किया। बताया कि सोनीपत जिला के बडख़ालसा गांव के एक नौजवान ने शीश को मुगल सेना से बचाने के लिए अपना शीश अर्पित कर दिया।

 **मैराथन को हरी झंडी
इसके बाद उन्होंने मैराथन को हरी झंडी दिखाई और यात्रा पर पुष्प वर्षा की।  इससे पहले मंत्री की उपस्थिति में ‘हिंद की चादर, तेग बहादुर’ गीत लांच किया गया । इस अवसर पर कीर्तन के अलावा शबद गायन भी किया गया। मैराथन में शामिल लोगों ने ‘बोले सो निहाल’ और ‘भारत माता की जय’ के जयकारे लगाए। 
उनमे गजब का उत्साह, जोश तथा श्रद्धा व भक्ति भाव था। इस मौके पर युवाओं ने गतके का भी प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में युवा मैराथन में भाग लेने के लिए प्रात: 5 बजे ही एनडीआरआई चौक पर पहुंच गए। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री को कृपाण व गुरु तेग बहादुर जी का चित्र भेंट किया गया।
इस मौके पर विधायक जगमोहन आनंद, इंद्री के विधायक रामकुमार कश्यप, असंध के विधायक योगेंद्र राणा, नीलोखेड़ी के भगवानदास कबीरपंथी, उपायुक्त उत्तम सिंह, एसपी गंगा राम पूनिया, मेयर रेणु बाला गुप्ता, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रवीण लाठर, सरदार त्रिलोचन सिंह, एसडीएम अनुभव मेहता, सीटीएम मोनिका, चीनी मिल एमडी अदिति, डीडीपीओ कंचन लता, प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी आदि मौजूद रहे।