हिसार (दिनकर गावड़ी):- लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार के डेयरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के डेयरी रसायन विभाग द्वारा “डेयरी विज्ञान, खाद्य विज्ञान एवं गुणवत्ता आश्वासन में उभरते रुझान” विषय पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में डेयरी एवं खाद्य विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे नवीन अनुसंधान, तकनीकी विकास, खाद्य गुणवत्ता एवं सुरक्षा तथा मानकीकरण से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लुवास के कुलपति प्रो. (डॉ.) विनोद कुमार वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि डेयरी एवं खाद्य विज्ञान का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन तकनीकों तथा अनुसंधान को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि खाद्य गुणवत्ता एवं सुरक्षा का सीधा संबंध जनस्वास्थ्य से है, इसलिए वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रयोगशाला से आगे बढ़ाकर किसानों, पशुपालकों और उद्योग तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रहे अनुसंधान से जुड़ने तथा नवाचार को अपनाने का आह्वान किया।

डेयरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. सुशीला मान ने कहा कि उपभोक्ताओं की बदलती पसंद और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच डेयरी क्षेत्र में मूल्यवर्धित उत्पादों, आधुनिक प्रसंस्करण तकनीकों तथा गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों के विकास की आवश्यकता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों और उद्योग के बीच मजबूत समन्वय से अनुसंधान के परिणामों को व्यावहारिक रूप दिया जा सकता है।

आयोजन अध्यक्ष एवं डेयरी रसायन विभाग की विभागाध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मीनाक्षी विरमानी ने कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य डेयरी एवं खाद्य विज्ञान में नवीन अनुसंधान, तकनीकी विकास और गुणवत्ता मानकों पर चर्चा के साथ विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुभवों से अवगत कराना है।

इस कार्यक्रम के पहले तकनीकी सत्र में ऑस्ट्रेलिया स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड की प्रोफेसर निधि बंसल ने “नेक्स्ट-जेनरेशन डेयरी प्रोसेसिंग: द रोल ऑफ नॉन-थर्मल टेक्नोलॉजीज एंड नॉन-बोवाइन मिल्क” विषय पर ऑनलाइन माध्यम से व्याख्यान दिया। उन्होंने डेयरी प्रसंस्करण में उपयोग की जा रही आधुनिक गैर-तापीय तकनीकों, उनकी उपयोगिता तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही, भैंस एवं गाय से अन्य पशुओं के दूध के बढ़ते महत्व और डेयरी उद्योग में इसके संभावित उपयोगों की जानकारी देते हुए बदलती उपभोक्ता आवश्यकताओं के अनुरूप नवीन प्रसंस्करण तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।

दूसरे तकनीकी सत्र में यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम, निंगबो, चीन की सहायक प्रोफेसर डॉ. मिनाक्षी शर्मा ने “प्राकृतिक वर्णकों से प्राप्त कार्यात्मक खाद्य पदार्थों के लिए नैनो-वितरण प्रणालियां” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त वर्णकों के उपयोग से विकसित नैनो-वितरण प्रणालियों की कार्यप्रणाली एवं संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन प्रणालियों का उपयोग कार्यात्मक खाद्य पदार्थों में जैव सक्रिय घटकों की प्रभावशीलता और उपयोगिता बढ़ाने में किया जा सकता है। साथ ही, उन्होंने खाद्य विज्ञान के क्षेत्र में नैनो-प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व तथा भविष्य में इसके संभावित अनुप्रयोगों की जानकारी भी साझा की।

तीसरे तकनीकी सत्र में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की निदेशक एवं स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट एंड एजुकेशन आउटरीच की प्रमुख, मानक समन्वय एवं निगरानी विभाग की डॉ. नेहा यादव ने “खाद्य उद्योग के लिए भारतीय मानक: शिक्षाविदों, बीआईएस, उद्योग एवं नियामकों के बीच सहयोग” विषय पर विचार रखे। उन्होंने खाद्य गुणवत्ता एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारतीय मानकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित खाद्य उत्पादों के लिए निर्धारित मानकों का प्रभावी अनुपालन आवश्यक है। उन्होंने अकादमिक संस्थानों, बीआईएस, उद्योग जगत एवं नियामक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय और नियमित संवाद को खाद्य क्षेत्र में गुणवत्ता एवं मानकीकरण को मजबूत करने के लिए आवश्यक बताया। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को खाद्य मानकों और गुणवत्ता आश्वासन से संबंधित विषयों की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया।

संगोष्ठी में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों, उद्योग विशेषज्ञों एवं संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। तीनों तकनीकी सत्रों में डेयरी प्रसंस्करण, कार्यात्मक खाद्य पदार्थ, नैनो-प्रौद्योगिकी, खाद्य गुणवत्ता एवं मानकीकरण जैसे समसामयिक विषयों पर उपयोगी विचार-विमर्श हुआ।

इस अवसर पर पशुचिकित्सा महाविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राम नजर चौधरी, अनुसंधान निदेशक डॉ. रजत गर्ग, स्नातकोत्तर अधिष्ठाता डॉ. गौतम, मानव संसाधन एवं प्रबंधन निदेशिका डॉ. सोनिया सिन्धु, पशुचिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. अनीश यादव, आई.पी.वी.एस. निदेशक डॉ. संजय यादव एवं लेखा नियंत्रक श्री विकास खरब सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

संगोष्ठी के आयोजन में आयोजन सचिव डॉ. रूबी सिवाच, एवं डॉ. विजय जे. जाधव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन समिति में डॉ. वंदना चौधरी, डॉ. तेजिंदर पाल सिंह, डॉ. सतीश जांगड़ा, डॉ. सुरभि, डॉ. कनिष्ट बत्रा तथा डॉ. निलेश सिंधु शामिल रहे।