नवांशहर:- पंजाब सरकार की यह कैसी शिक्षा क्रांति है, जो स्कूल ऑफ एमिनेंस, नवांशहर में हो रही है? यह सवाल जम्हूरी अधिकार सभा, जिला शहीद भगत सिंह नगर ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस से किया है। जम्हूरी अधिकार सभा के जिला सचिव जसबीर दीप ने एक प्रेस बयान के जरिए कहा कि पंजाब सरकार फीस के मामले में निजी स्कूलों पर तो बहुत सख्ती दिखा रही है, लेकिन अपने गिरेबान में झांकने को तैयार नहीं है। 
उन्होंने कहा कि स्कूल ऑफ एमिनेंस, नवांशहर द्वारा छात्रों से ली जा रही अतिरिक्त फीस सरकार के मुफ्त और विश्व स्तरीय शिक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि स्कूल के प्रिंसिपल सरबजीत सिंह सरकार द्वारा निर्धारित 876 रुपये की एडमिशन फीस के बजाय छात्रों से करीब 5,000 रुपये वसूल रहे हैं। इसके पीछे प्रिंसिपल यह तर्क दे रहे हैं कि यह राशि स्टाफ की कमी को पूरा करने और अतिरिक्त शैक्षिक सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए ली जा रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार दावा करते आ रहे हैं कि स्कूल ऑफ एमिनेंस में छात्रों को किताबें, वर्दियां, प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं बिना किसी अतिरिक्त खर्च के दी जा रही हैं। ऐसे में अगर अभिभावकों से सरकारी फीस से कई गुना अधिक राशि वसूली जा रही है, तो यह सरकार के शिक्षा मॉडल की हकीकत को बेनकाब करता है। 
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित फीस में वृद्धि करने का कानूनी अधिकार स्कूल प्रबंधन समिति को किस कानून या नियम के तहत दिया गया है? उन्होंने कहा कि प्रिंसिपल राष्ट्रीय विज्ञान सेमिनार, इंटरनेशनल मैथमेटिक्स ओलंपियाड और अन्य अकादमिक गतिविधियों में छात्रों की भागीदारी के नाम पर अतिरिक्त फीस वसूलने को भी जायज ठहरा रहे हैं।
जसबीर दीप ने कहा कि एक तरफ पंजाब सरकार सरकारी खर्चे पर शिक्षकों को विदेशों में प्रशिक्षण के लिए भेजने का बड़े स्तर पर प्रचार कर रही है, लेकिन दूसरी तरफ यदि सरकारी स्कूलों में स्टाफ की कमी पूरी करने और अकादमिक गतिविधियों के लिए छात्रों से ही अतिरिक्त पैसा लिया जा रहा है, तो यह सरकार के दावों की हवा निकाल देती है। 
उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाने, दोष साबित होने पर प्रिंसिपल के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और छात्रों से वसूली गई अतिरिक्त राशि तुरंत वापस करने की मांग की। साथ ही शिक्षा विभाग से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या स्कूल प्रबंधन समितियों को सरकार द्वारा निर्धारित फीस से अधिक राशि वसूलने का कोई कानूनी अधिकार है?