करनाल, 26 मई:-आज के भागदौड़ और तनाव भरे दौर में इंसान को हंसना सीखना चाहिए, क्योंकि मुस्कान ही जीवन को सहज और सकारात्मक बनाती है। यह कहना है देश के प्रसिद्ध हास्य कवि एवं साहित्यकार प्रेम सेठी का, जो पिछले करीब 55 वर्षों से साहित्य लेखन और काव्य पाठ के माध्यम से लोगों को हंसी और संदेश दोनों दे रहे हैं।
25 से अधिक काव्य संग्रह और व्यंग्य संग्रह लिख चुके प्रेम सेठी का पहला चर्चित व्यंग्य संग्रह ‘हनुमान जी का टीए बिल’ रहा, जिसके बाद उनके कई व्यंग्य और काव्य संग्रह साहित्य जगत में चर्चा का विषय बने। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ पंजाबी साहित्य को भी नई पहचान दिलाने में अहम योगदान दिया।
प्रेम सेठी ने खास बातचीत में कहा कि आज लोग छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव में आ जाते हैं, जबकि जीवन को सहजता और हास्य के साथ जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि “हंस-हंस कर जीने का जो मजा है, वह घुट-घुट कर जीने में कहां।”
उन्होंने युवाओं और साहित्यकारों को किताबों से दोस्ती करने की सलाह देते हुए कहा कि एक अच्छा कवि बनने के लिए अध्ययन बेहद जरूरी है। कवियों को अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए और समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास करना चाहिए।
बैंकिंग क्षेत्र में भी लंबे समय तक सेवाएं देने वाले प्रेम सेठी पंजाब नेशनल बैंक से प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने बैंकिंग विषयों पर भी कई किताबें लिखीं। साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें हिंदी साहित्य अकादमी, पंजाबी साहित्य अकादमी सहित देश की कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। हाल ही में उन्हें हरी सिंह स्मृति पुरस्कार से भी नवाजा गया। साहित्य के अलावा उन्होंने मुल्तानी फिल्म में अभिनय कर अपनी प्रतिभा का अलग परिचय दिया। बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी कुछ पंक्तियां भी सुनाईं “नप है जो जल नहीं है,
इस व्यवस्था का हल नहीं है।
व्यवस्थाओं के समर में वहीं हारते हैं,
जिनमें बेईमानी और छल नहीं है।” उन्होंने कहा कि हास्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का एक सशक्त माध्यम भी है।