लुधियाना:- लुधियाना के 56 वर्षीय ब्रेन स्ट्रोक मरीज को मोहाली स्थित लिवासा अस्पताल में सफल मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी के जरिए नया जीवन मिला। इस आधुनिक प्रक्रिया की मदद से मरीज को जानलेवा न्यूरोलॉजिकल आपात स्थिति से उबरने में मदद मिली।
शुक्रवार को लुधियाना के एक होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जानकारी देते हुए लिवासा अस्पताल, मोहाली के डायरेक्टर-न्यूरो एवं स्पाइन सर्जन और हेड ऑफ न्यूरो-इंटरवेंशन डॉ. विनीत सग्गर ने बताया कि समय पर इलाज और स्ट्रोक के आधुनिक उपचार में हुई प्रगति से मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
मरीज को स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने के बाद लिवासा अस्पताल लाया गया था। विस्तृत इमेजिंग जांच में मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली एक प्रमुख रक्त वाहिका में रुकावट का पता चला। स्ट्रोक की गंभीरता और मरीज की चिकित्सकीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों की टीम ने मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी करने का निर्णय लिया।
इस प्रक्रिया में एक विशेष उपकरण को रक्त वाहिकाओं के भीतर से गुजारकर रुकावट वाली जगह तक पहुंचाया जाता है और मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को बाधित करने वाले खून के थक्के को बाहर निकाल दिया जाता है।
डॉ. सग्गर ने आगे कहा कि बड़ी रक्त वाहिकाओं में रुकावट के कारण होने वाले स्ट्रोक के चुनिंदा मरीजों के उपचार में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी ने महत्वपूर्ण बदलाव लाया है।
उन्होंने कहा, “स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हर मिनट महत्वपूर्ण होता है। इसके लक्षणों की समय पर पहचान, तुरंत इमेजिंग जांच और उचित सुविधाओं से लैस स्ट्रोक सेंटर में शीघ्र रेफर करने से मरीज के उपचार के परिणामों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।”
डॉ. सग्गर ने ‘नमस्ते’ प्रोटोकॉल के बारे में भी जानकारी दी। यह एक सरल और व्यावहारिक तरीका है, जिसकी मदद से परिवार के सदस्य और आसपास मौजूद लोग स्ट्रोक के संभावित लक्षणों को जल्दी पहचान सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इस प्रोटोकॉल के तहत मरीज को दोनों हाथ जोड़ने या उठाने, मुस्कुराने और बोलने, बाईं तथा दाईं ओर देखने और खड़े होने के लिए कहा जाता है। यदि मरीज इनमें से कोई भी काम करने में कठिनाई महसूस करता है, जैसे कि एक हाथ नीचे गिरना, चेहरे का एक ओर झुक जाना, बोलने में लड़खड़ाहट, आंखों की असामान्य गति या शरीर का संतुलन बिगड़ना, तो इसे स्ट्रोक का चेतावनी संकेत मानना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
