
सनावा में पहलगाम पीड़ितों को सीपीआई एमएल ने दी श्रद्धांजलि
नवांशहर, 29 अप्रैल- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) न्यू डेमोक्रेसी ने पहलगाम में मारे गए 26 निर्दोष लोगों को गांव सनावा में श्रद्धांजलि दी। पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। इस अवसर पर हत्याओं की निंदा करते हुए जसबीर दीप, भूपिंदर सिंह वड़ैच और कमलजीत सनावा ने कहा कि पहलगाम में धार्मिक रूप से प्रेरित सामूहिक हत्याकांड, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए, बहुत ही जघन्य, क्रूर और निंदनीय कृत्य है, हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।
नवांशहर, 29 अप्रैल- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) न्यू डेमोक्रेसी ने पहलगाम में मारे गए 26 निर्दोष लोगों को गांव सनावा में श्रद्धांजलि दी। पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। इस अवसर पर हत्याओं की निंदा करते हुए जसबीर दीप, भूपिंदर सिंह वड़ैच और कमलजीत सनावा ने कहा कि पहलगाम में धार्मिक रूप से प्रेरित सामूहिक हत्याकांड, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए, बहुत ही जघन्य, क्रूर और निंदनीय कृत्य है, हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।
यह नाम किसी भी धर्म या स्वतंत्रता संग्राम के हित में नहीं है। यह संतोष की बात है कि कश्मीर में लोग, खासकर मुसलमान, इस जघन्य कृत्य के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी जांच के अनुसार, अब तक चार बड़ी सामूहिक हत्याएं हुई हैं। अब यह पहलगाम सामूहिक हत्याकांड हुआ है। इन तीनों में दो चीजें समान हैं।
एक तो इन सभी में एक खास वर्ग को निशाना बनाया गया, चिट्टी सिंह पुरा में सिख, पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस और पहलगाम में हिंदू। दूसरे, ये सभी एक खास घटना से जुड़े हैं। चिट्टी सिंह पुरा की घटना वर्ष 2000 में हुई थी, जब अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत दौरे पर आए थे, पुलवामा की घटना तब हुई, जब देश में चुनाव होने वाले थे और पहलगाम की घटना तब हुई, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस भारत दौरे पर आए थे।
दूसरा पहलू यह है कि यह घटना उस समय हुई, जब मोदी सरकार द्वारा पारित वक्फ संशोधन अधिनियम का देशभर में कड़ा विरोध हो रहा था। ये सभी बातें इसे संदिग्ध बनाती हैं। इसलिए इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। नेताओं ने कहा कि जब पूरा देश इस हृदय विदारक घटना पर शोक मना रहा था, तब प्रधानमंत्री सऊदी अरब से लौट आए, लेकिन बिहार में चुनावी रैली को संबोधित करना पसंद किया।
नेताओं ने आगे कहा कि संघीय फासीवाद की सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की नीति देश और लोगों को खून-खराबे और विनाश के अलावा कुछ नहीं दे सकती। लोगों को इसका डटकर मुकाबला करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें युद्ध का माहौल बनाने का विरोध करना चाहिए, क्योंकि युद्ध से खुशी नहीं, बल्कि मातम पैदा होता है।
