वायव्य के वास्तु दोष सुल्तान को भी राज्य से गायब कर सकते हैं _डॉ. भूपेंद्र वास्तुशास्त्री।

24 फरवरी होशियारपुर- भाग्यशाली लोग भवन बनाते हैं, भाग्यशाली लोग वास्तु शास्त्र के अनुसार मकान बनाते हैं और जो लोग वास्तु के नियमों की अनदेखी कर वास्तु दोष युक्त मकान बनाते हैं, वे जानबूझ कर अपने सौभाग्य को दुर्भाग्य में बदल देते हैं, ऐसा अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वास्तुविद एवं लेखक डॉ. भूपेंद्र वास्तुशास्त्री का मानना है।

24 फरवरी होशियारपुर- भाग्यशाली लोग भवन बनाते हैं, भाग्यशाली लोग वास्तु शास्त्र के अनुसार मकान बनाते हैं और जो लोग वास्तु के नियमों की अनदेखी कर वास्तु दोष युक्त मकान बनाते हैं, वे जानबूझ कर अपने सौभाग्य को दुर्भाग्य में बदल देते हैं, ऐसा अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वास्तुविद एवं लेखक डॉ. भूपेंद्र वास्तुशास्त्री का मानना है।
यदि मुख्य दिशाओं वाला कोना प्रदूषित हो तो इसके दुष्परिणाम अधिक गंभीर होते हैं। इसमें यदि वायव्य कोण में वास्तु दोष हो तो व्यक्ति को असंख्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यदि वायव्य कोण में बोरवेल, भूमिगत जल स्रोत, मुख्य द्वार, कोण में वृद्धि या कमी आदि हो तो यह गंभीर वास्तु दोष की श्रेणी में आता है। 
वायव्य के बारे में एक प्रचलित कहावत है कि वायव्य के दोष सुल्तान को भी राज्य से गायब कर सकते हैं। 
यदि वायव्य के साथ-साथ नैरित्य कोना भी दूषित हो तो जातक रोग, पागलपन, गृहत्याग, पीछा करना, शत्रुता, घृणा, कारावास, भूत-प्रेत से कष्ट, स्थानांतरण, कलंक, आंतरिक शक्तिहीनता, शारीरिक दुर्बलता, गलतफहमी, पड़ोसियों से सम्बन्ध विच्छेद, शक्तिहीन, दुर्बल, भय से ग्रस्त तथा कर्ज के दलदल में इस प्रकार फंस जाता है मानो वह कष्ट भोगने के लिए ही पैदा हुआ हो।